मोदी सरकार “मराठी भाषा को अभिजात दर्जा” के लिए घोषित 500 करोड़ रुपये कब देगी..? कांग्रेस पार्टी का सवाल

वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने कहा -“मराठी भाषा और सांस्कृतिक नीति” की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अक्षम्य उपेक्षा..!

मुंबई, 7 मार्च। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाळदादा तिवारी ने मराठी भाषा को मिले अभिजात (क्लासिकल) दर्जे के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा घोषित 500 करोड़ रुपये की सहायता राशि अब तक जारी न करने पर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे मराठी भाषा और संस्कृति के साथ “अक्षम्य उपेक्षा” करार दिया।


तिवारी ने कहा कि वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने मराठी भाषा को अभिजात दर्जा देने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस प्रस्ताव को मंजूरी तो दे दी, लेकिन डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी मराठी भाषा के संवर्धन के लिए घोषित 500 करोड़ रुपये की सहायता राशि अब तक जारी नहीं की गई।


उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर केंद्र सरकार मराठी भाषा को अभिजात घोषित करती है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में यह कहा कि मराठी भाषा संस्कृत से उत्पन्न हुई है। तिवारी ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह के बयान से यह संकेत देने की कोशिश की जा रही है कि मराठी वास्तव में स्वतंत्र और अभिजात भाषा नहीं है?


तिवारी ने यह भी कहा कि अभिजात दर्जा मिलने के बाद मराठी भाषा के अध्ययन और शोध के लिए “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने केंद्र के शिक्षा मंत्रालय को भेजा था, लेकिन वह अब तक मंत्रालय में लंबित पड़ा है।


उन्होंने कहा कि जब किसी भाषा को अभिजात दर्जा मिलता है तो केंद्र सरकार का संस्कृति मंत्रालय उस भाषा के विकास, संरक्षण और अध्ययन के लिए विशेष अनुदान देता है, लेकिन मराठी भाषा के मामले में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।


तिवारी ने महायुति सरकार की सांस्कृतिक नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 2024 में चुनाव से पहले सरकार ने सांस्कृतिक नीति घोषित कर 17 उद्देश्यों का दावा किया था। इसमें ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से लेकर सांस्कृतिक विकास तक कई वादे किए गए थे, लेकिन हाल ही में पेश किए गए बजट में इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पुस्तकालय सरकार की उदासीनता के कारण बंद हो रहे हैं और साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियां दम तोड़ने लगी हैं। मराठी माध्यम की स्कूलें तेजी से बंद हो रही हैं, लेकिन उन्हें बचाने या बढ़ाने के लिए भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

तिवारी ने कहा कि वर्तमान सरकार के पास स्पष्ट सांस्कृतिक नीति ही नहीं है और मराठी भाषा के संवर्धन के प्रति उसकी इच्छाशक्ति भी दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सांस्कृतिक नीति और बजट प्रावधान मराठी भाषा और संस्कृति का अपमान करने वाले हैं।

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